छोटी सी ख़ुशी

घुटा घुटा सा आसमान लगता है

सूरज का कहीं निशान नहीं

हवा भी जैसे गुमसुम सी है

और बारिश का कोई आसार नहीं

 

कहने को बहुत है लेकिन

मन आज थोड़ा उदास है

थकी थकी सी आंखें हैं और

यादों में उलझा दिमाग है

 

और ऐसे में जब, अचानक एक नन्ही सी जान

फुदक फुदक के सामने आ जाती है

और दुनिया भर का प्यार जूटा कर

वोह जब मुझे गले लगाती है

 

मन पिघल जाता है और उदासी थम जाती है

उसकी चटपटी बातें सुन कर

चेहरे पर  हंसी आ जाती है

सूरज भी  छुप नहीं पाता

और हवा भी फरफराती है

 

दूर से देख ककर जब वोह भागी चली आती है

दिल में ख़ुशी से बारिश हो जाती है

आँखों में एक नयी उम्मीद वापिस आ जाती है

आसमान भी खिल उठता है और

एक अन कही सी कमी पूरी हो जाती है 

छोटी सी तारा

When you really should be packing, but you have to take a break to pen this down –

यह नन्हें कपढ़ों की ढहेरियाँ

यह छोटी सी जुराब

यह खिलौनों का डिब्बा

और तुम्हारी मन पसंद किताब

रोज़ाना इनको समेटने की आदत पढ़ गयी है

तुम्हारी छुई हुई चीज़ों को सूँघने की आदत पढ़ गयी है

ग़ुस्सा नाक पे टिका रहता है

और सतर्क सवाल ख़त्म नहीं होते

आवाज इतनी बुलंद है और

चेहरे पे भाव नहीं ठहरते

रोज़ाना तुमसे झगढ़ने की आदत पढ़ गयी है

तुम्हारे तर्क सुनने और समझने की आदत पढ़ गयी है

कैसा मोह हो तुम, कैसी हो माया

तारा, तुम में है मेरा, सब कुछ समाया

Split

Split is how I feel
Like a twig broken into two
With two very sharp edges
Uncertain on both ends.

Ironically, the thinner the edge,
The sharper it is
But also more brittle 
Than the whole.


Split is how I feel
Like a chunk of ice
Broken off from the iceberg
Floating on uncharted water

Ironically, the iceberg 
Shall stay where it is
And the lighter chunk of ice 
Shall flow with the waves

 

March on, go find your self

 

Ah! Hindi is an amazing language. I cannot do justice to this beautiful poem with the limited English vocabulary. But here’s my faint attempt –

 

This is not the time to question your existence.

It is time for you to discover your purpose.

This world awaits you, and your grit

March on, go find your self.

 

You were born to be free. You were born to fight

Break the chains that are imposed on you

Turn your weakness into your strengths, and set sail

 

Your actions will speak for themselves.

Keep pushing forward with a pure heart, and good intent.

You are not the victim here, you are the only hope.

 

You are not a flame that flickers, you are the fire that blazes through.

One that flashes bright and strong.

Burning down the evil traps, and letting good prevail.

 

It takes courage to be righteous,

So take pride in your actions.

And when you are on shaky ground, remember there is inspiration even if you fail.

 

This is not the time to question your existence.

It is time for you to discover your purpose.

This world awaits you, and your grit

March on, go find your self.

 

क़ाफ़िला

रास्ता लम्बा सही, पर क़ाफ़िले रंगीन तो है।

मेरे लिए, ऐ ज़िंदगी तेरे इरादे इतने संगीन क्यूँ है ?

कभी कभी हर लम्हा खिंचा तना बसर होता है

और कभी, आँख झपकी नहीं, और दिन गुज़र जाता है

 

यह जो चंद लम्हे, जो मैं अपने ही दिन से, ख़ुद ही चुरा रही हूँ,

और थोड़ा सा अकेलापन जिसे मैं कुछ सदियों से जुटा रही हूँ

आख़िर किस लिए?

अपने वजूद का मक़सद ढूँढने में तो अरसे गुज़र जाएँगे

फ़िलहाल तो मुंतज़िर हूँ मैं इस शाम को ढालने के लिए

 

खुली आँखों से देखे हुए ख़्वाबों को हक़ीक़त में तब्दील होते देखा है,

इतना दिया है ज़िंदगी ने फिर भी, अपनी किसमत की वफ़ादारी पर यक़ीन नहीं होता

हर दिन की शुरुआत एक अजीब से डर से होती है,

जैसे हिसाब लगा रहा है कोई, इन कुछ ख़ुश नवाँ घड़ियों का

 

एक कमी है जिसको लफ़्ज़ों में ब्यान नहीं किया जा सकता

एक ऐसी ख़्वाहिश जिसका इल्म हुआ उनके जाने के बाद

अपनी क़ाबिलियत का कभी गुमान नहीं किया हमने, बस चाहा था कि फकर की स्साँसे वो भी भरते

और,उनकी कुर्बनियों का कुछ क़र्ज़ अदा हम भी करते

 

चले गए इससे पहलेकी कोई शिकवे होते

वक़्त बहुत कम था उनके और हमारे दरमियाँ

कुछ साल जो साथ बिताए उसमें हमने समझ लिया

रास्ते लम्बे नहीं, पर क़ाफ़िले रंगीन तो थे

In California 

When the shower drops feel like splashes of paint on a canvas.

And the cacophony of water falling on the floor feels like drum beats echoing in an old classroom.

When the sun’s rays manage to warm you just enough.

And the crisp air around you fills you with hope and passion for the day that is about to start.

When you can hear the birds loud and clear from your bedside.

And you watch the early moon rise above the clouds.

When words fill your mind but express no desire to come out.

And tears of joy come and rest at the corner of your eye. And a smile that brims and yet tucks right under your lips.

Then, be thankful. For being in love. Being happy. And most likely being in California.

दीवाली की अगली सुबह

 
दीवाली की अगली सुबह 
सरसों के तेल से काले मिटटी के दीये 
घर में एक मीठी सी खुशबू
कुछ फूलों की महक और कुछ अगरबत्ती की सुगंध 
एक अजीब सी शांति, थोड़ी सी अनकही उदासी भी। 
 
सुबह यह भी है और वह भी थी
जब “उठ जाग मुसाफिर भोर भयि अब रैन कहाँ जो सोवत है.…” सुन कर ही उठा करते थे.  
और पापा के कदमों की आवाज़ से सुबह की शुरुआत होती थी 
उठ कर बालकनी से सड़कों पर जले हुए पटाखों का ढेर देखना 
बुझे  हुए दीयों की बाटियाँ और मोम बत्ती की बचे हुए ठूंठ समेटना 
और फिर माँ की आवाज़ की नाश्ता तैयार है। 
 
अधूरी यादों से उभरी आज की सुबह 
धीरे धीरे एहसास हुआ की शायद कही दूर, बहुत दूर एक सुबह इतेज़ार करती है आज भी …… 
चाय और सूखे रस्क  से दिन की हुई शुरुआत 
और मिटटी के दीयों की ढेरी से थोड़ा काजल चुरा लिया
सुना है उदास आँखें, बिना काजल के अक्सर, अनजाने में हकीकत बयान कर देती हैं