दीवाली की अगली सुबह

  दीवाली की अगली सुबह  सरसों के तेल से काले मिटटी के दीये  घर में एक मीठी सी खुशबू कुछ फूलों की महक और कुछ अगरबत्ती की सुगंध  एक अजीब सी शांति, थोड़ी सी अनकही उदासी भी।    सुबह यह भी है और वह भी थी जब "उठ जाग मुसाफिर भोर भयि अब रैन कहाँ …

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बारिश

यह बारिश क्यूँ अंजानी लगती हैकम गीली, कम दीवानी लगती हैएक झूठी सी कहानी लगती हैभीगा देती है , मिटा देती हैदिल में हलचल सी भी मचा देती हैयादें बीती हुई बारिशों की दिला देती हैआसमान को समुन्दर में डूबा देती हैबादलों में इस शहर को गुमा देती हैठहरी सी इस ज़िन्दगी का झूठा सा बयान देती हैयह मन …

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