धुंधली सुबह

कोहरे में लिपटी थी आज की सुबह यकीनन ऐसा लगा जैसे कोई  ख्वाब देख रही हूँ मैं दूर दूर तक एक सफ़ेद चादर बिछी थी सूरज का भी आज उठने का इरादा नहीं था दूर से गाड़ियों  की टिमटिमाती बत्तियां देखि तो ऐसा लगा, जैसे तारे ज़मीन पर एक सीधी लकीर में बिखरे हों माहौल …

Continue reading धुंधली सुबह

छोटी सी ख़ुशी

घुटा घुटा सा आसमान लगता है सूरज का कहीं निशान नहीं हवा भी जैसे गुमसुम सी है और बारिश का कोई आसार नहीं   कहने को बहुत है लेकिन मन आज थोड़ा उदास है थकी थकी सी आंखें हैं और यादों में उलझा दिमाग है   और ऐसे में जब, अचानक एक नन्ही सी जान …

Continue reading छोटी सी ख़ुशी

छोटी सी तारा

When you really should be packing, but you have to take a break to pen this down - यह नन्हें कपढ़ों की ढहेरियाँ यह छोटी सी जुराब यह खिलौनों का डिब्बा और तुम्हारी मन पसंद किताब रोज़ाना इनको समेटने की आदत पढ़ गयी है तुम्हारी छुई हुई चीज़ों को सूँघने की आदत पढ़ गयी है …

Continue reading छोटी सी तारा

Split

Split is how I feel Like a twig broken into two With two very sharp edges Uncertain on both ends. Ironically, the thinner the edge, The sharper it is But also more brittle Than the whole. Split is how I feel Like a chunk of ice Broken off from the iceberg Floating on uncharted water …

Continue reading Split

क़ाफ़िला

रास्ता लम्बा सही, पर क़ाफ़िले रंगीन तो है। मेरे लिए, ऐ ज़िंदगी तेरे इरादे इतने संगीन क्यूँ है ? कभी कभी हर लम्हा खिंचा तना बसर होता है और कभी, आँख झपकी नहीं, और दिन गुज़र जाता है   यह जो चंद लम्हे, जो मैं अपने ही दिन से, ख़ुद ही चुरा रही हूँ, और …

Continue reading क़ाफ़िला